इटावा जिसे प्राचीन इष्टिकापुरी के नाम से भी जाना जाता है, ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां स्थित ग्यारह रुद्रेश्वर महादेव मंदिर का विशेष महत्व है, जिसे भगवान शिव के भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। यह मंदिर गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा द्वारा स्थापित शिवलिंग का घर है, और यह शिवलिंग उज्जैन के महाकालेश्वर शिवलिंग से भी श्रद्धा में समान रूप से महत्वपूर्ण है।
ग्यारह रुद्रेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व सिर्फ इटावा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। भक्तों का मानना है कि यहां रुद्राभिषेक करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के गर्भगृह में मुख्य शिवलिंग के साथ-साथ ग्यारह अन्य शिवलिंग और पंच शिवलिंग भी स्थापित हैं। यहां अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ-साथ मां पीतांबरा की भी पूजा होती है।
मंदिर के निचले हिस्से में स्थित यमुना घाट का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक होता है, खासकर जब यमुना का जलस्तर बढ़ता है। दो साल पहले जब यमुना का जलस्तर बढ़ा था, तो कहा जाता है कि मां यमुना ने भगवान शिव का अभिषेक किया था। इस मंदिर की भव्यता और इसके चमत्कारी अनुभवों के कारण यह श्रद्धालुओं के बीच एक गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है।
मंदिर के पुजारी पंडित अजय दुबे के अनुसार, ग्यारह रुद्रेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना अश्वत्थामा ने की थी। महाभारत के युद्ध में द्रोपदी के पुत्रों का वध करने के बाद अश्वत्थामा ने अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए पृथ्वी पर 108 शिवलिंग स्थापित किए, जिनमें से ग्यारहवां शिवलिंग यही इटावा में स्थित है।
यह मंदिर न केवल आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह धार्मिक परंपराओं और शैव तंत्र की एक महत्वपूर्ण धरोहर भी है। श्रद्धालु यहां रुद्राभिषेक, कालसर्प अनुष्ठान, और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए आते हैं, और वे यहां भगवान शिव के चमत्कारी प्रभावों का अनुभव करते हैं।
रिपोर्ट चंचल दुबे इटावा