इटावा को मिला कर्मठ और जनसुनवाई को समर्पित जिलाधिकारी — शुभ्रात शुक्ला
उत्तर प्रदेश के इटावा में प्रशासनिक कार्यशैली की एक नई मिसाल देखने को मिल रही है। जिले के जिलाधिकारी शुभ्रात शुक्ला अपनी मेहनत, अनुशासन और जनता के प्रति समर्पण के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जहाँ सामान्य रूप से किसी भी जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय का समय सुबह 9:30 या 10 बजे से शाम 5 या 6 बजे तक माना जाता है, वहीं इटावा के जिलाधिकारी ने अपने काम करने के तरीके से इस परंपरा को बदल दिया है। वे दिन का सबसे बड़ा हिस्सा सीधे जनता के बीच बिताने के लिए जाने जा रहे हैं।

सुबह लगभग 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक वे लगातार जनसुनवाई कर आम लोगों की समस्याएँ सुनते हैं। दूर-दराज़ गांवों से आने वाले किसान, बुजुर्ग, महिलाएँ और जरूरतमंद बिना किसी झिझक अपनी बात जिलाधिकारी तक पहुंचा पा रहे हैं। जनसुनवाई के दौरान हर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं।

दोपहर बाद 3 बजे से शाम 6 बजे तक वे विभागीय अधिकारियों के साथ लगातार बैठकों के माध्यम से विकास कार्यों और योजनाओं की समीक्षा करते हैं, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे बल्कि जमीन पर दिखाई दे।इतना ही नहीं, शाम के समय जिलाधिकारी स्वयं गांव-गांव पहुंचकर किसानों की समस्याओं को सुनते हैं और मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं। राजस्व, सिंचाई, बिजली और फसल से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता देते हुए त्वरित निस्तारण उनकी कार्यशैली की पहचान बन चुका है।

इटावा के लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद ऐसा जिलाधिकारी मिला है जो कार्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि 24 घंटे जिले की जिम्मेदारी को निभाने में लगा रहता है। उनकी सक्रियता ने प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की दूरी को कम किया है।

आज इटावा में सुशासन की नई तस्वीर उभर रही है — जहाँ प्रशासन सिर्फ आदेश देने वाला नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को समझने और हल करने वाला साथी बनता दिखाई दे रहा है।संवेदनशील प्रशासन की नई पहचान बने इटावा के जिलाधिकारी शुभ्रात शुक्ला
जिलाधिकारी शुभ्रात शुक्ला की कार्यशैली का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि वे अधिकारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी विकास प्रक्रिया का भागीदार मानते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों की भागीदारी से साफ-सफाई अभियान और पौधारोपण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए गए।आज इटावा में प्रशासन की छवि एक सख्त लेकिन संवेदनशील व्यवस्था के रूप में उभर रही है। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर समस्याएं सुनते हैं, तो भरोसा अपने-आप मजबूत हो जाता है।

इटावा में विकास और सुशासन की यह नई दिशा बताती है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति के साथ काम करे, तो बदलाव सिर्फ योजनाओं में नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी में भी दिखाई देता है — और यही बदलाव जिलाधिकारी शुभ्रात शुक्ला की पहचान बनता जा रहा है।
रिपोर्ट चंचल दुबे इटावा
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