*मानस सम्मेलन में संतश्री राजेंद्रदास महाराज ने कहा*
*राम चरित सुनने वाला नृशंस नहीं हो सकता*
इटावा। जनपद प्रदर्शनी पंडाल में दो दिवसीय राम चरित मानस सम्मेलन का शुभारम्भ भारत के विख्यात संत मलूक पीठाधीश्वर पूज्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज देवाचार्य ने करते हुए कहा कि राम चरित्र सुनने का फल यही है कि उस व्यक्ति में फिर नृशंसता नहीं रहती। वह निश्छल और निष्कपट हो जाता है।
अपने संबोधन में मानस की महिमा पर बोलते हुए पूज्य संत श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने कहा कि राम चरित मानस वैदुष्यता से सम्पन्न ऐसा विशिष्ट ग्रंथ है, जिसको कह पाने की सामर्थ्य एकमात्र गोस्वामी तुलसीदास जी में ही हुई। यह
मनुष्यता का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है, जिससे संपूर्ण मानवता का कल्याण हो रहा है। इसीलिए कहा कि जो इसे सच्ची श्रद्धा से सुनता है, उसके जीवन से कठोरता , क्रूरता और नृशंसता समाप्त हो जाती है। उसका जीवन निश्छल और निष्कपट बन जाता है। और यदि जीवन भर राम कथा और राम चरित्र सुनकर भी व्यक्ति में ऐसा स्वभाव न आया तो सब व्यर्थ है। आज लोग शक्ल सूरत से राक्षस जैसे भले न दिखते हो, लेकिन अपने माता पिता, भाई, परिवार और समाज में भी ऐसी क्रूरता और नृशंसता करते हैं, कि राक्षस भी शरमा जाएं। इसलिए राम चरित मानस का मनुष्य के जीवन को संवारने में बहुत महत्व है, सभी को इसका श्रद्धापूर्वक सानिध्य लेना ही चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम का चरित्र इतना उज्जवल है कि संपूर्ण सृष्टि में उन जैसा कोई नहीं है। उन्होंने निषादराज गुह को गले लगाया और उनकी माता का कौशल्या के समान आदर किया। राम चरित मानस में तीन शब्द हैं, जिनका तात्विक संदेश यही है कि अगर राम से मिलना है तो चरित्र के निर्वहन पर विशेष ध्यान देना होगा। राम जी जिस आचरण पर चले, वही मार्ग राम से मिलने का सबसे सुगम साधन हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानस से बड़ा शिक्षक कोई नहीं है, जिसने सारे समाज को जीवन संवारने का सुगम सद्मार्ग दिखाया है।
इससे पूर्व कार्यक्रम के संरक्षक डॉ विश्वपति त्रिवेदी एवं संयोजक संजीव अग्रवाल (एफसीए) ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन सुधीर मिश्र ने किया। सम्मेलन में संत सुबोधानंद सरस्वती, स्वामी वासुदेव मुनि पटियाला बाबा , इस्कॉन केंद्र प्रभारी गोविंद गिरधारी दास, पं. मनुपुत्र दास, अर्थशास्त्री प्रजापति त्रिवेदी, एडीएम संदीप श्रीवास्तव, सुनीता दीक्षित श्यामा, डॉ. कुश चतुर्वेदी, ओम नारायण शुक्ला, सुरेश अरोरा, राजेंद्र दीक्षित, सतीश यादव, गोपाल वर्मा, कृपानंद वाजपेई, रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी, नीरज दीक्षित, राजीव लोचन दीक्षित, कुलदीप अवस्थी, केके सक्सेना, ओपी मिश्रा, राजेश वाजपेई, मुन्ना मिश्रा, आशुतोष त्रिवेदी, संकेत मिश्रा, हिमांशु, अर्चना चतुर्वेदी, पूनम पांडेय, प्रीती पांडे, शिखा अग्रवाल, शुभदा शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अंत में रामायण जी की आरती का गायन किया गया। संयोजक संजीव अग्रवाल ने सभी का आभार जताया।
रिपोर्ट चंचल दुबे इटावा
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