इटावा में मृत्युंजय माँ पीतांबरा महायज्ञ की तैयारियाँ शुरू, भूमिपूजन संपन्न
कन्नौज की पावन धरती पर 17 से 29 मार्च, 2025 तक परम पूज्य महाराज श्री रामदास जी के मार्गदर्शन में संपन्न हुए 1108 कुण्डीय मृत्युंजय माँ पीतांबरा महायज्ञ ने न केवल कन्नौज, बल्कि संपूर्ण सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। इस महायज्ञ में माँ पीतांबरा और भगवान मृत्युंजय की कृपा से 22.5 करोड़ आहुतियों का संकल्प पूर्ण हुआ, जिसने विश्व शांति और जनकल्याण का संदेश चारों दिशाओं में प्रसारित किया। पूर्णाहुति के पावन अवसर पर अगले महायज्ञ के स्थान के चयन हेतु माँ भगवती राजराजेश्वरी के समक्ष कई शहरों के नाम प्रस्तुत किए गए, जिसमें माँ की दिव्य इच्छा और गुरुदेव के आशीर्वाद से इटावा का नाम चुना गया।
इसी क्रम में आज, 05 अप्रैल, 2025 को इटावा में प्रस्तावित 1108 कुण्डीय मृत्युंजय माँ पीतांबरा महायज्ञ के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह आयोजन इटावा के एसडी कॉलेज ग्राउंड में तय किया गया है, जहाँ सनातन धर्मावलंबियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भूमिपूजन में जनमेजय सिंह भदौरिया, कुलदीप अवस्थी, अभिषेक त्रिपाठी, मिक्की, संजय शर्मा, ब्रजेश अवस्थी, प्रशांत दीक्षित, पवन शाक्य, प्रदीप चौहान सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।
परम पूज्य गुरुदेव श्री रामदास जी 12 अप्रैल, 2025 को कन्नौज से विदाई लेकर इटावा के लिए प्रस्थान करेंगे (यह तिथि संभावित है), जहाँ वे इस महायज्ञ की नींव रखेंगे और श्रद्धालुओं को इस पुण्य कार्य से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। कन्नौजवासियों से अपील की गई है कि वे गुरुदेव को ढोल-नगाड़ों की गूँज, फूलों की मालाओं और भक्ति के साथ एक ऐतिहासिक विदाई दें, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।
इटावा के सनातन धर्मावलंबियों के लिए यह स्वर्णिम अवसर है कि वे इस महायज्ञ से जुड़ें और माँ पीतांबरा के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करें। यह यज्ञ न केवल व्यक्तिगत कल्याण का साधन बनेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार भी करेगा। कन्नौज से शुरू हुई यह आध्यात्मिक ज्योति अब इटावा तक पहुँचेगी, जो सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बनेगी।
रिपोर्ट चंचल दुबे इटावा